Saturday, 24 October 2015

मगर ...


एक छान कविता आहे, पण माझी नाही आवडली म्हणून शेअर करत आहे.

" प्यार "
सभी करते है मगर ...
कोई दिल से करता है तो ...
कोई दिमाग सें करता है

" दर्द "
सभी इंसानो मे है
मगर ...
कोई दिखाता है तो ...
कोई छुपाता है .....

" अहसास "
सबको होता है मगर ...
कोई मेहसूस करता है तो ...
कोई समज नही पाता


शर्त लगी थी "दुनिया"को
एक लब्ज़ मे लिखने की....
वो किताबे ढुँढते रह गये
मैंने "बेटी" लिख दिया......!!!

" हमसफर "
सभी है मगर ...
कोई साथ देता है तो ...
कोई छोड देता है .....

" रिश्ता "
कई लोगों से होता है , मगर ...
कोई प्यार से निभाता है तो ...
कोई नफरत से निभाता है ..

"इंसानियत"
दिल में होती है,
हैसियत' में नहीं..!

उपरवाला 'कर्म' देखता हैं,
वसियत' को नहीं.!!. 


©

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